गीत के बोल
पत्ते तले क्या चुपचाप लटका है?
नीना को एक प्यूपा दिखता है।
वह कुछ दूर खड़ी होकर देखती है।
खोल काँपता है, एक दरार उभरती है।
पहले सिर, फिर पैर दिखाई देते हैं।
वयस्क तितली धीरे बाहर आती है।
पंख खुलते हैं, तितली ठहरती है।
वे चिकने होते, सख़्त होकर सूखते हैं।
पंख तैयार हों, तभी वह उड़ पाती है।
फिर उसकी पहली उड़ान शुरू होती है।
वह खाली खोल को कसकर थामती है।
नीचे लटकती है, पंख झुके हुए।
पहले वे छोटे, नरम, सिकुड़े हैं।
शरीर का तरल उनमें भरता है।
पंखे जैसे फैलकर चिकने होते हैं।
नीना धीरज से दूर खड़ी देखती है।
खुले पंख सख़्त होकर सूखते हैं।
फिर तितली उन्हें पूरा खोलती है।
पंख खुलते हैं, तितली ठहरती है।
वे चिकने होते, सख़्त होकर सूखते हैं।
पंख तैयार हों, तभी वह उड़ पाती है।
फिर उसकी पहली उड़ान शुरू होती है।
धूप में उड़कर फूल पर जा बैठती है।
खाली खोल टहनी पर रह जाता है।