गीत के बोल
ये सफ़ेद फाहे कहाँ से आए?
धूसर बादल छतों पर तैर रहा है
इनका घूमता सफ़र कहाँ शुरू हुआ?
कल्पना में बादल के भीतर उड़ूँ
पानी की अनदेखी भाप, नन्ही बूँदें
अंदर काफ़ी ठंड हो जाती है
बर्फ़ के नन्हे कण बनने लगते हैं
ठंडे बादल में बर्फ़ का क्रिस्टल बनता
पानी जुड़ता, फाहा बढ़ता जाता
गुरुत्व उसे नीचे खींचता है
हवा ठंडी रहे, तो बर्फ़ बनकर पहुँचे
क्रिस्टल में और पानी जुड़ता जाता
छह बाँहें, पर रूप अलग-अलग
फाहे हवा में घूमते, झूमते
बढ़कर वे और भारी हो जाते
अब वे ऊपर टिक नहीं पाते
ठंडे बादल में बर्फ़ का क्रिस्टल बनता
पानी जुड़ता, फाहा बढ़ता जाता
गुरुत्व उसे नीचे खींचता है
हवा ठंडी रहे, तो बर्फ़ बनकर पहुँचे
रास्ते में वह पूरा नहीं पिघलता
एक फाहा दस्ताने पर टिकता है
गर्म हथेली पर पिघले, बूँद बने
ठंडे बादल में बर्फ़ का क्रिस्टल बनता
पानी जुड़ता, फाहा बढ़ता जाता
गुरुत्व उसे नीचे खींचता है
हवा ठंडी रहे, तो बर्फ़ बनकर पहुँचे
अब बादल का पूरा सफ़र समझ आया
एक फाहा चमककर बूँद बनता है