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एक घायल पेड़ से निकली चिपचिपी राल रेत और कीचड़ की परतों के नीचे सुरक्षित हो जाती है। यह बालगीत बताता है कि करोड़ों वर्षों में राल धीरे-धीरे सख्त होकर एम्बर कैसे बनती है। पानी उसे बाहर ला सकता है, पर बनाता नहीं।
दिए गए स्रोतों पर आधारित मौलिक व्याख्याएँ।
प्रकाश
दृश्य प्रकाश विद्युतचुंबकीय विकिरण का वह भाग है जिसे हमारी आँखें पहचानती हैं। यह निर्वात में भी ऊर्जा पहुँचा सकता है।
स्रोत
ऐम्बर
ऐम्बर प्राचीन वृक्षों का राल है जो समय के साथ जीवाश्म बन गया। इसमें फँसे कीट या पौधों के हिस्से सुरक्षित रह सकते हैं; यह पेड़ के रस से नहीं बनता।
स्रोत
इस रिकॉर्डिंग के उपशीर्षकों से लिया गया पाठ।
गीत के बोल
¿Qué brilla en ese árbol tan antiguo?
De una rama herida brota resina
Dorada y pegajosa va por la corteza
Un insecto pequeño llega a la gota
Sus patitas se quedan pegadas
La gota cae al suelo del bosque
Arena y lodo la cubren y cuidan
Resina antigua queda bajo tierra
La cubren sedimentos: arena y lodo
Por millones de años se endurece
Y se transforma poco a poco en ámbar
Las estaciones pasan sobre el suelo
Bajo las capas sigue protegida
No pasan días, sino millones de años
Al fin, el ámbar claro atrapa la luz
Resina antigua queda bajo tierra
La cubren sedimentos: arena y lodo
Por millones de años se endurece
Y se transforma poco a poco en ámbar
El agua lo descubre, no lo crea
Las olas llevan ámbar a la playa
Un niño halla un rastro dorado del bosque
Resina antigua queda bajo tierra
La cubren sedimentos: arena y lodo
Por millones de años se endurece
Se vuelve ámbar, rastro del bosque antiguo
इस भाषा के संस्करण के बोल
उस पुराने पेड़ पर क्या चमका?
टूटी डाल से राल निकलने लगी
सुनहरी, चिपचिपी, छाल पर बही
एक छोटा कीड़ा बूँद पर उतरा
उसके नन्हे पैर वहीं चिपक गए
बूँद जंगल की जमीन पर गिरी
रेत और कीचड़ ने उसे ढककर बचाया
पुरानी राल जमीन में दबी है
रेत-कीचड़ की परतें उसे ढकती हैं
करोड़ों साल तक सख्त होती है
धीरे बदलकर एम्बर बनती है
ऊपर मौसम बदलते जाते हैं
नीचे परतों में वह बची रही
दिन नहीं, करोड़ों साल गुजरते
फिर साफ एम्बर रोशनी में चमका
पुरानी राल जमीन में दबी है
रेत-कीचड़ की परतें उसे ढकती हैं
करोड़ों साल तक सख्त होती है
धीरे बदलकर एम्बर बनती है
पानी उसे बाहर लाया, बनाया नहीं
लहरें उसे गीली रेत तक लाईं
एक बच्चे ने जंगल की सुनहरी छाप पाई
पुरानी राल जमीन में दबी है
रेत-कीचड़ की परतें उसे ढकती हैं
करोड़ों साल तक सख्त होती है
बदलकर एम्बर बनी—जंगल की छाप
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