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كلمات الأغنية
पतझड़ में भालू की कैसी दावत?
जामुन, बीज, जो मिलता, सब खाता
लाल-सुनहरे पत्ते ऊपर नाचें
हर कौर से चर्बी जमा होती है
उसमें ऊर्जा बाद के लिए बचती
बर्फ़ गिरे, झाड़ियाँ खाली हो जाएँ
दूर खाने की खोज में ताकत लगती
सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता
भालू सोकर ऊर्जा बचाता है
आराम से सर्दी गुजर जाती
चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती
जड़ों के नीचे मांद उसे बचाती
भालू सिमटे, बहुत कम हिलता है
उसका पहलू धीरे उठता-गिरता
चर्बी से उसे ऊर्जा मिलती है
भोजन लौटे, तब तक ताकत बचती
सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता
भालू सोकर ऊर्जा बचाता है
आराम से सर्दी गुजर जाती
चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती
बसंत की धूप में बर्फ़ पिघलती
अब खाना फिर आसानी से मिलता
भालू मांद से रोशनी में आता
सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता
भालू सोकर ऊर्जा बचाता है
आराम से सर्दी गुजर जाती
चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती
कम भोजन में नींद ने उसका साथ दिया
अब खाना लौटा, वह फिर चल पड़ा